35 बेवफा शायरी

 1: कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम,

तुम्हारे बगैर अगर तुम देख लेते तो,

कभी तन्हा न छोड़ते मुझे !



2: न ढूंढ मेरा किरदार दुनिया की भीड़ में,

वफादार तो हमेशा तन्हा ही मिलते हैं !



3: काश तू समझ सकती मोहब्बत के उसूलों को,

किसी की साँसों में समाकर उसे तन्हा नहीं करते !



4: अकेला हूँ पर मुस्कुराता बहुत हूँ,

खुद का साथ बड़ी शिद्दत से दे रहा हूँ !



5: मुझको मेरे अकेलेपन से अब,

शिकायत नहीं है मैं पत्थर हूँ मुझे,

खुद से भी मुहब्बत नहीं है !



6: मेने बंद कर दिया दिखाना की,

मुझे हर्ट होता है क्यूंकि मेरी,

फीलिंग्स समझने वाला कोई नहीं है !



7: एक तुम्हीं थे जिसके दम पे चलती थी साँसें मेरी,

लौट आओ जिंदगी से वफा निभाई नहीं जाती !



8: वो मन बना चुके थे हमे छोड़ जाने का,

किस्मत तो सिर्फ उनके लिए एक बहाना था !



9: कुदरत के इन हसीन नजारों का हम क्या करें,

तुम साथ नहीं तो इन चाँद सितारों का क्या करें !



10: अकेले ही सहना अकेले ही रहना होता है,

अकेलेपन का हर एक आँसू अकेले ही पीना होता है !



11: आज कुछ अजनबी सा अपना वजूद लगता है,

साथ हैं सब मगर दिल क्यों अकेला सा लगता है !



12: तुझसे दूर जाने के बाद तन्हा तो हूँ लेकिन,

तसल्ली बस इतनी सी है,

अब कोई फरेब साथ नहीं !



13: शायद वो बेहतर की तलाश में है,

और हम तो अच्छे भी नही है !



14: तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है,

आखरी सास तक तेरा इंतजार करू !



15: जो अकेले रहना सीख जाते है,

उन्हें फिर किसी और की जरुरत नहीं पड़ती !



16: हालात खराब हो तो अपने ही,

गैरो के जैसा बर्ताव करने लगते है !



17: यूँ तो हर रंग का मौसम मुझसे वाकिफ है मगर,

रात की तन्हाई मुझे कुछ अलग ही जानती है !



18: बारिश की हर एक बूंद को पता है

कि अकेलापन क्या होता है !



19: बस मेरी एक आखरी दुआ कबूल हो जाए

इस टूटे दिल से तेरी यादे दूर हो जाए !



20: कहने लगी है अब तो मेरी तन्हाई भी मुझसे

मुझसे कर लो मोहब्बत मैं तो बेवफा भी नहीं !



21: खुद से ही बातें हो जाती है अब तो,

लोग वैसे भी कहा सुनते है आज कल !



22: ए दिल जिसके दिल में तेरे लिए

कोई जगह ही नहीं है,

वही तेरे लिए खास क्यों है !



23: जिंदगी में कुछ गलत लोगों ने,

आकर हमें जिंदगी का,

सही सबक सिखा दिया !



24: अब वही होगा जो दिल चाहेगा,

आगे जो होगा देखा जायेगा !



25: जागने का अज़ाब सह-सह कर,

अपने अंदर ही सो गया हूँ मैं।



26: अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे, क्यूँ तन्हा से हो गए हैं तेरे जाने के बाद।



27: इस से पहले कि मुझ को सब्र आ जाए,

कितना अच्छा हो कि लौट आओ तुम।



28: कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,

हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है।



29: एक तेरे ना होने से बदल जाता है सब कुछ

कल धूप भी दीवार पे पूरी नहीं उतरी।



30: जगमगाते शहर की रानाइयों में क्या न था,

ढूँढ़ने निकला था जिसको बस वही चेहरा न था,

हम वही, तुम भी वही, मौसम वही, मंज़र वही,

फ़ासले बढ़ जायेंगे इतने मैंने कभी सोचा न था।



31: ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तों,

जिसको कोई मिल गया वो और तन्हा हो गया।



32: सहारा लेना ही पड़ता है मुझको दरिया का,

मैं एक कतरा हूँ तनहा तो बह नहीं सकता।



33: वो हर बार मुझे छोड़ के चले जाते हैं तन्हा,

मैं मज़बूत बहुत हूँ लेकिन कोई पत्थर तो नहीं हूँ।



34: कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ-कहाँ से गुजरे,

अकेले ही नजर आये हम जहाँ-जहाँ से गुजरे।



35: जब से देखा है चाँद को तन्हा,

तुम से भी कोई शिकायत ना रही।

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