30 तन्हाई भरी शायरी

 1: मैं अपनी तन्हाई को

सरेआम लिखना चाहती हूं

मेरे महबूब तेरे दिये

जख्म को लिखना चाहती हूं.!!



2: रास्ते बंट गए मंजिलें

कहीं खो गई

उम्मीदों के समुंदर में

तकदीरे कहीं खो गई..!



3: तेरा साथ है हमसे कुछ

इस तरह छोड़कर जाना

मानो जैसे नदियो का बिन

पानी के सुखा रह जाना..!



4: वो पूछते है हमसे

मुश्किले बहुत है

जिंदगी की राहो में

क्या चल पाओगे तुम

कांटो से भरी राहो में..!



5: जिंदगी का राग पुराना याद आया

आज गुजरा हुआ जमाना याद आया

थम सी गई जिंदगी खयालो की बदहाली मे

वो रंग और गम मुझको दोबारा याद आया..!



6: गम भी बहुत है जिंदगी में

फिर भी खुश रहने का बहाना चाहिए

यह बड़ी-बड़ी इमारते हमे मत दिखाओ

हमे तो बस गंगा का किनारा चाहिए..!



7: मुझे तन्हाई की आदत है

मेरी बात छोडोए तुम बताओ कैसी हो !



8: ए मेरे दिल कभी तीसरे की उम्मीद भी ना किया कर

सिर्फ तुम और मैं ही हैं इस दश्त ए तन्हाई में!



9: ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है

ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है!



10: थकन टूटन उदासी ऊब तन्हाई अधूरापन

तुम्हारी याद के संग इतना लम्बा कारवाँ क्यूँ है !



11: अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ

ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ!



12: किस से कहु अपनी तन्हाई का आलम

लोग चेहरे के हसी देखए बहुत खुश समझते हैं!



13: मेरी तन्हाई को मेरा शौक न समझना

बहुत प्यार से दिया है ये तोहफा किसी ने !



14: तन्हाई की आग में कहीं जल ही न जाऊँ

के अब तो कोई मेरे आशियाने को बचा ले!



15: कोसते रहते हैं अपनी जिंदगी को उम्रभर

भीड़ में हंसते हैं मगर तन्हाई में रोया करते हैं!



16: मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें

ये लीजे आप का घर आ गया है हात छोड़ें!



17: मैं तन्हाई को तन्हाई में तन्हा कैसे छोड़ दूँ

इस तन्हाई ने तन्हाई में तनहा मेरा साथ दिए है!



18: अब तो याद भी उसकी आती नहीं

कितनी तनहा हो गई तन्हाईयाँ



19: अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है

कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है!



20: इश्क के नशे मे डूबे तो जाना हमने फ़राज़

के दर्द मे तन्हाई नही होती तन्हाई मे दर्द होता हैं!



21: कांटो सी चुभती है तन्हाई अंगारों सी सुलगती है

तन्हाई कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे मैं रोती

हूँ तो रोने लगती है तन्हाई!



22: अब तो उन की याद भी आती नहीं

कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ!



23: शाम.ए तन्हाई में इजाफा बेचैनी

एक तेरा ख्याल न जाना एक दूसरा तेरा जवाब न आना!



24: हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद ना कर दे,

तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर।



25: ऐ सनम तू साथ है मेरे मेरी हर तन्हाई में

कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की

इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में।



26: इस तरह हम सुकून को महफूज़ कर लेते हैं

जब भी तन्हा होते हैं तुम्हें महसूस कर लेते हैं।



27: अपने साए से चौंक जाते हैं

उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा!



28: अपनी तन्हाई में खलल यूँ डालूँ सारी रात

खुद ही दर पे दस्तक दूँ और खुद ही पूछूं कौन!



29: यादों में आपके तन्हा बैठे हैं

आपके बिना लबों की हँसी गँवा बैठे हैं

आपकी दुनिया में अँधेरा ना हो

इसलिए खुद का दिल जला बैठे हैं।



30: मैंने तन्हाई में हमेशा तुम्हे पुकारा है,

सुन लो गौर से ऐ सनम, तेरे बिना

ज़िंदगी अधूरी सी लगती है।

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